पाठ्यक्रम का नाम:
श्रीमद्भगवद्गीता — आत्मपरिवर्तन का विज्ञान (Bhagavad Gita — The Science of Self-Transformation)
🌼 पाठ्यक्रम का उद्देश्य (Course Objective):
इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य गीता के माध्यम से जीवन, आत्मा और कर्तव्य के विज्ञान को समझना है।
गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि यह जीवन प्रबंधन, आत्मनियंत्रण और आत्मसाक्षात्कार का सार्वभौमिक मार्गदर्शक है।
इस कोर्स का ध्येय है —
“ज्ञान से कर्म तक, भ्रम से प्रकाश तक, और व्यक्ति से आत्मा तक की यात्रा।”
📚 पूर्ण पाठ्यक्रम संरचना (Complete Syllabus Structure)
🔶 भाग 1: गीता का परिचय (Introduction to the Gita)
गीता का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि — महाभारत के भीष्म पर्व में संवाद
गीता के 18 अध्याय — एक दार्शनिक यात्रा
गीता का स्थान वेदान्त और योग दर्शन में
गीता का आधुनिक जीवन में महत्व
गीता का सार्वभौमिक संदेश — कर्म, ज्ञान, भक्ति का समन्वय
🔶 भाग 2: अर्जुन का संकट और मानव मनोविज्ञान (Human Conflict and Inner Psychology)
अर्जुन विषाद योग (अध्याय 1) — युद्ध का प्रतीकात्मक अर्थ
आत्मसंघर्ष: कर्म और कर्तव्य के बीच द्वंद्व
अर्जुन का पतन — मोह, माया और भ्रम की स्थिति
कृष्ण का पहला संदेश — विवेक से निर्णय
आधुनिक मनुष्य का अर्जुन भाव — निर्णयहीनता, भय, और तनाव
🔶 भाग 3: आत्मा और ब्रह्म का ज्ञान (Knowledge of the Self)
सांख्य योग (अध्याय 2) — आत्मा का शाश्वत स्वरूप
“न जायते म्रियते वा कदाचित्” — आत्मा की अमरता
कर्मयोग की आधारशिला — कर्तव्य का निःस्वार्थ भाव
आत्मा, मन और बुद्धि का विज्ञान
आधुनिक मनोविज्ञान से तुलनात्मक अध्ययन
🔶 भाग 4: कर्मयोग — निःस्वार्थ कर्म का मार्ग (Path of Selfless Action)
कर्म, अकर्म और विकर्म का भेद
कर्म के तीन स्तर — तमसिक, राजसिक, सात्त्विक
निष्काम कर्म का अर्थ — परिणाम से विमुक्त कार्य
“कर्मण्येवाधिकारस्ते” — कर्म की मर्यादा और स्वतंत्रता
कार्यस्थल और समाज में कर्मयोग का प्रयोग
🔶 भाग 5: ज्ञानयोग — विवेक और बोध का विज्ञान (Path of Knowledge)
ज्ञान और विज्ञान का द्वैत
कर्म से ऊपर ज्ञान का स्थान
अहंकार और अज्ञान के आवरण
ज्ञानयोगी का लक्षण — समत्व, संयम, अनासक्ति
ब्रह्मविद्या के रूप में गीता का ज्ञानयोग
🔶 भाग 6: भक्तियोग — समर्पण और प्रेम का मार्ग (Path of Devotion)
भक्तियोग का भाव — प्रेम, श्रवण, स्मरण, सेवाभाव
भगवान का स्वरूप — सगुण और निर्गुण भक्ति
“भक्त्या मामभिजानाति” — भक्ति के माध्यम से ब्रह्मज्ञान
गीता का नवभक्ति सिद्धांत
भक्ति और ध्यान का समन्वय — कर्म में प्रेम, प्रेम में ध्यान
🔶 भाग 7: राजयोग और ध्यान का विज्ञान (Meditation and Inner Control)
अध्याय 6 — ध्यानयोग
मन का स्वभाव और नियंत्रण की प्रक्रिया
ध्यान के स्तर — अभ्यास और वैराग्य
योगी का जीवन — संयम, श्रद्धा और समाधि
ध्यान और आधुनिक मनोविज्ञान
🔶 भाग 8: प्रकृति और पुरुष — जीवन का द्वैत (Nature & Consciousness)
अध्याय 7–9 — ज्ञानविज्ञान और राजविद्या योग
प्रकृति के तीन गुण — सत्व, रज, तम
ईश्वर, जीव और प्रकृति का त्रिकोणीय संबंध
अद्वैत और द्वैत की समरसता
“ममैवांशो जीवलोके” — आत्मा की ईश्वरीय उत्पत्ति
🔶 भाग 9: विश्वरूप दर्शन — परमसत्य का अनुभव (Vision of the Universal Form)
अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग
कृष्ण का विश्वरूप — ब्रह्मांड की चेतना का प्रतीक
अर्जुन का विस्मय और समर्पण
दर्शन का विज्ञान — दृश्य और द्रष्टा का ऐक्य
आधुनिक दृष्टि से ब्रह्मांडीय चेतना का अर्थ
🔶 भाग 10: गीता का समन्वय — त्रिविध मार्गों का एकत्व (Integration of Three Paths)
कर्मयोग + ज्ञानयोग + भक्तियोग = पूर्ण योग
गीता के सात्त्विक गुण — श्रद्धा, संयम, विनय, आत्मबल
तीन प्रकार के कर्म, आहार, और श्रद्धा का विवेचन
मोक्ष और परमशांति की ओर यात्रा
गीता का वैज्ञानिक, दार्शनिक और व्यावहारिक मूल्य
🕰️ पाठ्यक्रम अवधि (Course Duration):
पूर्ण अवधि: 9 से 12 महीने
Modules: 10 मुख्य मॉड्यूल (प्रत्येक 3–4 सप्ताह)
Evaluation:
अध्यायवार प्रश्नोत्तर
आत्मचिंतन रिपोर्ट (Reflection Journal)
गीता श्लोक पाठ एवं अर्थ प्रस्तुति
प्रोजेक्ट: “गीता के सिद्धांतों का आधुनिक प्रयोग”
🎓 सीखने के परिणाम (Learning Outcomes):
आत्मा, कर्तव्य और कर्म के गूढ़ रहस्यों की गहरी समझ
जीवन के द्वंद्वों में स्पष्टता, शांति और विवेक
गीता के सिद्धांतों के माध्यम से आत्मविकास
ध्यान, समर्पण और निष्काम भाव का अभ्यास
आध्यात्मिकता को व्यवहारिक जीवन में उतारने की क्षमता
📖 अनुशंसित ग्रंथ (Recommended Texts):
श्रीमद्भगवद्गीता — मूल संस्कृत श्लोक और अर्थ सहित
गीता भाष्य — आदि शंकराचार्य
गीता रहस्य — लोकमान्य तिलक
The Bhagavad Gita As It Is — A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada
Essence of the Gita — Swami Vivekananda & Chinmayananda
Modern Science and Gita Consciousness — Comparative Studies
🌸 अतिरिक्त गतिविधियाँ (Supplementary Activities):
गीता ध्यान सत्र (Gita Meditation Circles)
श्लोक उच्चारण एवं अर्थ प्रतियोगिता
“गीता और जीवन प्रबंधन” पर कार्यशाला
अर्जुन-कृष्ण संवाद का नाट्य मंचन
“My Gita Diary” — आत्मचिंतन जर्नल
🕉️ पाठ्यक्रम का सार (Course Essence):
“गीता केवल युद्ध की नहीं, जीवन की कला सिखाती है।
यह हमें बाहरी संघर्षों में नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन में विजयी बनाती है।”