Indian Philosophy (Darshana)

पाठ्यक्रम का नाम:

भारतीय दर्शन (Darshana) — सत्य का दर्शन (Indian Philosophy — The Vision of Truth)


🌼 पाठ्यक्रम का उद्देश्य (Course Objective):

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य भारतीय दर्शन की गहराई को समझना है —
वह दर्शन जो केवल सोच नहीं, बल्कि अनुभव, आत्मज्ञान, और सत्य की साक्षात् अनुभूति पर आधारित है।
विद्यार्थी यह सीखेंगे कि कैसे विभिन्न दर्शन — सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदान्त —
जीवन, आत्मा, जगत और परमसत्य की खोज को एकीकृत करते हैं।


📚 पूर्ण पाठ्यक्रम संरचना (Complete Syllabus Structure)


🔶 भाग 1: भारतीय दर्शन का परिचय (Introduction to Indian Philosophy)

  1. ‘दर्शन’ शब्द का अर्थ और व्युत्पत्ति — ‘दृश्’ धातु से उत्पन्न, जिसका अर्थ है “देखना”, “सत्य का अवलोकन”।

  2. भारतीय दर्शन की विशेषताएँ

    • अनुभवपरक और व्यावहारिक

    • आत्मा, ब्रह्म और मोक्ष केंद्रित

    • धर्म, कर्म और पुनर्जन्म सिद्धांत

  3. दर्शन का वर्गीकरण:

    • आस्तिक दर्शन (Vedic-based) — वेद को प्रमाण मानते हैं

    • नास्तिक दर्शन (Non-Vedic) — वेद को प्रमाण नहीं मानते

  4. भारतीय दर्शन और पश्चिमी दर्शन में अंतर

  5. दर्शन का व्यावहारिक उद्देश्य — आत्ममुक्ति, न कि केवल बौद्धिक जिज्ञासा


🔶 भाग 2: आस्तिक दर्शन (Āstika Darshanas – The Orthodox Systems)

1. सांख्य दर्शन (Sankhya Philosophy)

  • संस्थापक: कपिल मुनि

  • प्रमुख ग्रंथ: सांख्य कारिका (ईश्वरकृष्ण)

  • सिद्धांत: पुरुष (Consciousness) और प्रकृति (Matter) का द्वैत

  • 25 तत्वों का सिद्धांत

  • मोक्ष का अर्थ — पुरुष और प्रकृति का विवेकजन्य भेदज्ञान

2. योग दर्शन (Yoga Philosophy)

  • संस्थापक: पतंजलि

  • प्रमुख ग्रंथ: योगसूत्र

  • उद्देश्य: चित्तवृत्ति निरोध और आत्मसाक्षात्कार

  • अष्टांग योग — यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि

  • सांख्य दर्शन से संबंध

3. न्याय दर्शन (Nyaya Philosophy)

  • संस्थापक: गौतम ऋषि

  • प्रमुख ग्रंथ: न्यायसूत्र

  • सिद्धांत: तर्क और प्रमाण द्वारा सत्य की खोज

  • चार प्रमाण: प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द

  • तर्क, वितर्क और विमर्श की कला

4. वैशेषिक दर्शन (Vaisheshika Philosophy)

  • संस्थापक: कणाद मुनि

  • प्रमुख ग्रंथ: वैशेषिक सूत्र

  • सिद्धांत: परमाणु (Atomism) और पदार्थ के छह पदार्थ —
    द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तत्वों का विश्लेषण

5. पूर्व मीमांसा (Purva Mimamsa)

  • संस्थापक: जैमिनि

  • प्रमुख ग्रंथ: मीमांसा सूत्र

  • वेदों के कर्मकाण्ड का विश्लेषण

  • धर्म, यज्ञ, कर्म और फल का तात्त्विक अर्थ

  • “कर्तव्य” के दर्शन का प्रतिपादन

6. उत्तर मीमांसा / वेदान्त दर्शन (Vedanta Philosophy)

  • संस्थापक: बादरायण (व्यास)

  • प्रमुख ग्रंथ: ब्रह्मसूत्र, उपनिषद, गीता

  • सिद्धांत: ब्रह्म ही एकमात्र सत्य, जगत मिथ्या, जीव ब्रह्म का अंश

  • उपशाखाएँ:

    • अद्वैत (शंकराचार्य)

    • विशिष्टाद्वैत (रामानुजाचार्य)

    • द्वैत (मध्वाचार्य)

  • मोक्ष का मार्ग: ज्ञान और भक्ति


🔶 भाग 3: नास्तिक दर्शन (Nāstika Darshanas – The Heterodox Systems)

1. चार्वाक दर्शन (Lokayata Philosophy)

  • सिद्धांत: प्रत्यक्ष ही ज्ञान का एकमात्र साधन

  • आत्मा, ईश्वर, पुनर्जन्म का निषेध

  • भौतिकवादी दृष्टिकोण — “यावत् जीवेत् सुखं जीवेत्”

2. बौद्ध दर्शन (Buddhist Philosophy)

  • संस्थापक: गौतम बुद्ध

  • चार आर्य सत्य, अष्टांग मार्ग

  • अनित्य, अनात्मा और क्षणिकवाद

  • शून्यता और करुणा का सिद्धांत

3. जैन दर्शन (Jain Philosophy)

  • संस्थापक: महावीर स्वामी

  • जीव और अजीव का द्वैत

  • कर्म और अहिंसा का सिद्धांत

  • अनेकांतवाद और स्याद्वाद


🔶 भाग 4: भारतीय दर्शन की तुलनात्मक दृष्टि (Comparative Analysis)

  1. सांख्य और योग — सिद्धांत और साधना का संबंध

  2. न्याय और वैशेषिक — तर्क और पदार्थ का समन्वय

  3. मीमांसा और वेदान्त — कर्म और ज्ञान का अंतर

  4. बौद्ध, जैन और वेदान्त का तुलनात्मक अध्ययन

  5. दर्शन और विज्ञान — आधुनिक संदर्भ में भारतीय दृष्टि


🔶 भाग 5: भारतीय दर्शन के प्रमुख सिद्धांत (Core Doctrines)

  1. आत्मा (Ātman) — शुद्ध, नित्य, अविकार

  2. ब्रह्म (Brahman) — सर्वव्यापक चेतना

  3. कर्म और पुनर्जन्म (Karma & Rebirth)

  4. मोक्ष (Liberation) — जन्म-मरण चक्र से मुक्ति

  5. प्रमाण (Means of Knowledge) — प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द, अर्थापत्ति, अनुपलब्धि

  6. सत्य का स्वरूप — सापेक्ष और परमसत्य का भेद


🔶 भाग 6: भारतीय दर्शन और आधुनिक युग (Relevance in Modern Life)

  1. भारतीय दर्शन और आधुनिक विज्ञान का संगम

  2. Ethics, Logic और Consciousness Studies में भारतीय दृष्टिकोण

  3. आध्यात्मिक मनोविज्ञान (Spiritual Psychology)

  4. नेतृत्व, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन में दर्शन की भूमिका

  5. वैश्विक समस्याओं पर भारतीय समाधान — अहिंसा, योग, आत्मसाक्षात्कार


🔶 भाग 7: दार्शनिक ग्रंथों का अध्ययन (Study of Texts)

  1. सांख्य कारिका

  2. पतंजलि योगसूत्र

  3. न्यायसूत्र और वैशेषिक सूत्र

  4. मीमांसा सूत्र और ब्रह्मसूत्र

  5. भगवद्गीता

  6. उपनिषद (ईश, कठ, मुण्डक, छान्दोग्य)


🕰️ पाठ्यक्रम अवधि (Course Duration)

  • पूर्ण अवधि: 9 से 12 महीने

  • Modules: 7 भाग / 28 Units

  • Evaluation:

    • लिखित परीक्षा

    • मौखिक संवाद / दर्शन वाद-विवाद (Shastrarth)

    • प्रोजेक्ट: “एक दर्शन का तुलनात्मक विश्लेषण”

    • आत्मचिंतन रिपोर्ट (Reflection Paper)


🎓 सीखने के परिणाम (Learning Outcomes)

  • भारतीय दार्शनिक परंपराओं की गहरी समझ

  • आत्मा, ब्रह्म, और मोक्ष के सिद्धांतों का अनुभवजन्य ज्ञान

  • तार्किक और विवेकपूर्ण सोच का विकास

  • जीवन में सत्य, विवेक और शांति का समावेश

  • दर्शन को आधुनिक संदर्भ में लागू करने की क्षमता


📖 अनुशंसित ग्रंथ (Recommended Texts)

  1. सांख्य कारिका — ईश्वरकृष्ण

  2. पतंजलि योगसूत्र — व्यास भाष्य

  3. न्यायसूत्र — गौतम

  4. वैशेषिक सूत्र — कणाद

  5. मीमांसा सूत्र — जैमिनि

  6. ब्रह्मसूत्र — बादरायण

  7. उपनिषद और गीता — शंकराचार्य भाष्य सहित

  8. Dr. S. Radhakrishnan — Indian Philosophy (Vol. I & II)


🌸 अतिरिक्त गतिविधियाँ (Supplementary Activities)

  • दर्शन संवाद (Philosophical Dialogue Sessions)

  • तुलनात्मक अध्ययन कार्यशाला

  • “Truth and Reality” विषय पर निबंध प्रतियोगिता

  • वेदांत ध्यान एवं आत्मचिंतन सत्र

  • इंटरएक्टिव लेक्चर: “What is Real?”